आज 22 अक्तूबर 2025 को पूरे देश में विश्वकर्मा जयंती पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व भाद्रपद मास में सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश के दिन मनाया जाता है। भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम शिल्पकार और सभी कलाओं व तकनीकी कौशलों का जनक माना जाता है।
यह दिन इंजीनियरों, कारीगरों, शिल्पकारों, आर्किटेक्ट्स, और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है।विश्वकर्मा को देवताओं का दैवीय शिल्पकार माना जाता है। उन्होंने इंद्र के लिए इंद्रपुरी,श्री कृष्ण के लिए द्वारका, पांडवों के लिए हस्तिनापुर,रावण के लिए स्वर्ण लंका,भगवान शिव का त्रिशूल और विष्णु के सुदर्शन चक्र का निर्माण किया।
रिगवेद और पुराणों में उन्हें “सर्व-शिल्पी” और “दैवीय इंजीनियर” के रूप में वर्णित किया गया है।इस दिन कारखानों, दुकानों, और कार्यालयों में मशीनों और औजारों को साफ कर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति के सामने सजाया जाता है। कार्यस्थल की समृद्धि और सुरक्षा के लिए यज्ञ, हवन, और आरती की जाती है। इस दिन को “मशीनों का विश्राम दिवस” भी कहा जाता है, क्योंकि परंपरागत रूप से औजारों का उपयोग नहीं किया जाता।
विश्वकर्मा कर्म और मेहनत के प्रतीक हैं। इस दिन मशीनों को विश्राम देकर उनके प्रति श्रद्धा और आभार व्यक्त किया जाता है, जिससे साल भर कार्य में सफलता और सुरक्षा बनी है।यह पर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि रचनात्मकता और मेहनत का उत्सव है। यह हमें सिखाता है कि हर निर्माण मेहनत और बुद्धि का परिणाम है, और सभी प्रकार के कौशल का सम्मान करना चाहिए।


