मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अधिकारियों के साथ बाढ़ राहत कार्यों पर चर्चा की और सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने घोषणा की कि धान की खरीद 16 अक्तूबर से शुरू होगी और बाढ़ प्रभावितों को 45 दिनों के भीतर मुआवजा दिया जाएगा।
अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि जहां पानी कम हुआ है, वहां गिरदावरी करें और जल्दी रिपोर्ट प्रस्तुत करें ताकि किसानों को शीघ्र मुआवजा मिल सके।मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं एक किसान परिवार से है और जब उनके खेत पानी में डूब जाते थे, तब घर का चूल्हा भी नहीं जलता था। उन्होंने वादा किया कि न तो वह चैन से बैठेंगे और न ही अधिकारियों को तब तक बैठने देंगे जब तक किसानों को मुआवजा नहीं मिल जाता।
फसल नुक्सान के लिए 20,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद भी एक हफ्ते का समय दिया जाएगा ताकि लोग बता सकें कि उनकी जमीन की गिरदावरी सही हुई है या नहीं।क्षतिग्रस्त घरों के लिए भी मुआवजा दिया जाएगा और राशि बढ़ाई जाएगी। SDRF के नियमों के अनुसार 6,800 रुपये का मुआवजा निर्धारित है, लेकिन सरकार अपने फंड से कम से कम 40,000 रुपये देगी। जिनके पशु, जैसे गाय या भैंस, बाढ़ में बह गए, उन्हें 37,500 रुपये का मुआवजा मिलेगा। अन्य पशुओं के लिए भी नियमों के अनुसार मुआवजा बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अब तक 55 मृतकों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 42 को मुआवजा मिल चुका है। 40 से 45 दिनों में अधिकारी हर गांव का दौरा कर नुक्सान का आकलन करेंगे। दीवाली के आस-पास बड़ी संख्या में चेक जारी किए जाएंगे। पंजाब ने इस संकट का डटकर मुकाबला किया है। लोग स्वयं ट्रॉलियों में राशन और राहत सामग्री लेकर प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। सामाजिक, धार्मिक और कलाकार संगठनों ने भी मदद की। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि गलत फॉर्म भरने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।


