Monday, April 27, 2026

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पंचदशनाम जूना अखाड़ा के 1008 ब्रह्मानन्द गिरी जी को मिली महामंडलेश्वर की उपाधि

NRI SANJH JALANDHAR (4 FEBRUARY )

जूना अखाड़े के मुखी स्वामी अवदेशानंद गिरी जी महाराज द्वारा तिलक कर पंचदशनाम जूना अखाड़ा के 1008 ब्रह्मानन्द गिरी जी को महामंडलेश्वर की उपाधि दी। कुंभ मेला में विभिन्न-विभिन्न अखाड़ों द्वारा महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की जाती है। प्रयाग राज में कुंभ के दौरान महामंडलेश्वर की उपाधि पाने का महत्व अधिक है। किसी भी संत को महामंडलेश्वर की पदवी मिलना एक बड़ा सम्मान है। महामंडलेश्वर बनने का सफर किसी तपस्या से कम नहीं होता है। अखाड़े की कठिन परीक्षाओं और त्याग के बाद ही कोई सन्यासी इस पद का हकदार होता है।

जालंधर से श्री हिन्दू तख्त के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुणाल अग्रवाल ने गुरु जी को हार्दिक शुभकामनाएं दी। कुणाल अग्रवाल ने कहा श्री हिन्दू तख्त ने सनातन विरोधी ताकतों को हमेशा करारा जवाब दिया है। अगर आज हिन्दू तख्त पूरे भारत मे फैल रहा है, सनातन की जय जय कार हो रही है तो उसमें ब्रह्मानन्द गिरी जी महाराज का बहुत बड़ा योगदान रहा।

पंजाब के लिए यह बहुत ही सम्मान की बात है। जल्द ही गुरु जी फिर पूरे पंजाब का दौरा करेंगे और जन जन तक सनातन की आवाज़ बुलंद करेंगे। सनातन विरोधी ताकतों के साथ गुरु जी ने शुरू से ही दृढ़ता के साथ सामना किया है।

ViaNRI
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