सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के बीच भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) प्रोजेक्ट्स के 1966 से बकाया पेमेंट को लेकर दशकों पुराने बिजली विवाद को सुलझा लिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने पंजाब और हरियाणा द्वारा हिमाचल प्रदेश को बिजली के रूप में बकाया पेमेंट के कैशलेस पेमेंट के केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह व्यवस्था 2011 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार होगी, जिसमें 1966 से भाखड़ा नांगल और ब्यास हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से पैदा हुए बिजली के बकाया का 7.19 प्रतिशत हिमाचल प्रदेश के पक्ष में तय किया गया था। कोर्ट ने कहा कि पंजाब और हरियाणा 20 साल के समय में
हिमाचल प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट (MU) बिजली का पेमेंट करेंगे। पंजाब सरकार ने शुरू में 15 साल में बिजली का बकाया पेमेंट करने के केंद्र के प्रस्ताव का विरोध किया था, लेकिन बाद में मांग की कि इस स्कीम को 30 साल के समय में लागू किया जाए, जबकि हिमाचल प्रदेश ने मांग की कि इसे 10 साल के अंदर लागू किया जाए।


