एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब उपभोक्ताओं के लिए ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (DAC) को अनिवार्य कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य फर्जी डिलीवरी को रोकना और सिस्टम में पारदर्शिता लाना है।
DAC एक वन-टाइम पासवर्ड (OTP) की तरह होता है, जो सिलेंडर की डिलीवरी से पहले ग्राहक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। अक्सर ग्राहकों से शिकायतें मिलती थीं कि सिलेंडर मिलने से पहले ही उसे ‘डिलीवर’ दिखा दिया जाता था या डिलीवरी बॉय द्वारा किसी गलत व्यक्ति को सिलेंडर दे दिया जाता था। इन धोखाधड़ियों और फर्जी बुकिंगों को रोकने के लिए ही यह कोड अनिवार्य किया गया है।
**प्रक्रिया इस प्रकार है
1. बुकिंग: सबसे पहले उपभोक्ता को फोन, SMS, ऐप या वेबसाइट के माध्यम से सिलेंडर बुक करना होगा।
2. कोड प्राप्ति:जब सिलेंडर डिलीवरी के लिए तैयार हो जाएगा और डिलीवरी बॉय गोदाम से निकलेगा, तो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक DAC (OTP) आ जाएगा।
3. पुष्टि:जब डिलीवरी बॉय आपके घर पहुंचेगा, तो आपको वह कोड उसे बताना पड़ेगा। वह इस कोड को अपनी डिवाइस में दर्ज करेगा, जिसके बाद ही डिलीवरी सिस्टम में कन्फर्म मानी जाएगी।
कीमतों की स्थिति:10 अप्रैल को एल.पी.जी. की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उल्लेखनीय है कि 1 अप्रैल को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 195.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि घरेलू सिलेंडर की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। उपभोक्ताओं से अपील की जाती है कि वे अपना मोबाइल नंबर गैस एजेंसी के पास जरूर अपडेट रखें, ताकि सिलेंडर डिलीवरी के समय कोई परेशानी न हो।


