मुख्यमंत्री भगवंत मान से सफाई मांगने के बाद अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के वायरल वीडियो की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री से किन्हीं दो टेस्टिंग लैब के नाम मांगे गए हैं, जहां से वीडियो की जांच करवाई जाएगी और पंथ के सामने सच्चाई लाई जाएगी।
जत्थेदार ने कहा कि जब गलती करने वाला व्यक्ति सत्ता में हो, तो उससे पूछताछ करना अकाल तख्त का दूसरा कर्तव्य बन जाता है। जत्थेदार ने कहा कि गोलक, सिख रहत मर्यादा और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के मुद्दे पर मुख्यमंत्री से सफाई मांगी गई है। भगवंत मान की सफाई मान ली गई है लेकिन विवादित वीडियो की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच की जाएगी।
जत्थेदार ने मुख्यमंत्री से कहा कि अगर उन्हें सिख रहत मर्यादा के बारे में पूरी जानकारी नहीं है, तो उन्हें इस पर कोई बयान नहीं देना चाहिए। जवाब में भगवंत मान ने भरोसा दिलाया कि वह भविष्य में सिख मुद्दों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। जत्थेदार ने कहा कि भगवंत मान को SGPC के खर्चों से जुड़ा SGPC गजट भी सौंपा गया, जिसमें हर पैसे के खर्च की जानकारी दर्ज है।
जत्थेदार ने मान से कहा कि वे इसे खुद पढ़ें और अपने दूसरे नेताओं को भी पढ़ाएं। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त साहिब किसी से कोई दुश्मनी नहीं रखता और यहां आने वाले हर इंसान को गले लगाया जाता है। सिंह साहिब ने कहा कि मुख्यमंत्री की सफाई के बाद अब सबकी नजरें अगले कदम पर हैं।
जत्थेदार ने कहा कि आने वाले समय में पांच सिंह साहिबानों की मीटिंग बुलाई जाएगी, जिसमें सोच-विचार के बाद ही अगला हुक्मनामा या फैसला सुनाया जाएगा। सिंह साहिब ने कहा कि बंग्या मुद्दे पर सरकार ने जल्दबाजी में काम किया है। भाई चत्तर सिंह जीवन सिंह हुरां और दमदमी टकसाल ने कई पवित्र सरूप छापे हैं। कई गुरुद्वारों में अखंड पाठ साहिब के पाठों की सीरीज है, कई सरूप ऐसे हैं।
गांवों में गुरुद्वारों में सरूप सुशोभित हैं, कुछ ने सरूप की रसीदें नहीं रखी हैं, कुछ के पास नंबर हैं लेकिन जिनकी रसीदें नहीं रखी हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि वे अनधिकृत हैं। वे गुरुद्वारा साहिब में हैं और वह सरूप भी सच्चे पातशाह का है। पहले ऐसा होता था कि जब किसी की मन्नत पूरी हो जाती थी,
तो वह कहता था कि हम महाराज का सरूप गुरुद्वारा साहिब में चढ़ाएंगे, लेकिन जब बेअदबी का दौर शुरू हुआ, तो नियम बदल दिए गए। बस यह समझने की ज़रूरत है कि गुरु साहिब का कोई भी सरूप अनधिकृत नहीं है। इसके अलावा शिरोमणि कमेटी के सदस्यों ने जिन लोगों पर लापरवाही की, उनके खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है।



