हिमाचल प्रदेश ने पनबिजली परियोजनाओं पर 2% भूमि राजस्व लगाने का फैसला किया है। यह जल सेस का वैकल्पिक और कानूनी रूप से मजबूत विकल्प माना जा रहा है।
पहले लगाया गया जल सेस हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने यह नया कदम उठाया है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस नए भूमि राजस्व से पंजाब पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की परियोजनाओं से पंजाब को सालाना लगभग 200-400 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है (रिपोर्टों में ₹436 करोड़ तक का अनुमान BBMB के लिए है, जिसमें पंजाब बड़ा हिस्सेदार है)।
हरियाणा और राजस्थान भी प्रभावित होंगे, क्योंकि BBMB के प्रोजेक्ट्स में ये राज्य पार्टनर हैं।पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और उनके प्रवक्ता नील गर्ग ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है।
नील गर्ग ने इसे पंजाब के वित्त पर सीधा हमला बताया और कहा कि AAP हर मोर्चे पर इसकी लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने हिमाचल की कांग्रेस सरकार पर चंडीगढ़ दावे के साथ-साथ यह नया सेस लगाने का आरोप लगाया और पंजाब कांग्रेस से अपना स्टैंड स्पष्ट करने को कहा।
साथ ही, केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है।दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि राज्य को अपनी जमीन पर भूमि राजस्व वसूलने का पूरा अधिकार है और पंजाब का विरोध बेतुका है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल पहले से ही अन्याय का शिकार हो रहा है।यह मामला पनबिजली परियोजनाओं की जमीन (जो ज्यादातर वन भूमि है और गैर-कृषि उपयोग में बदली गई) पर आधारित है।
हिमाचल सरकार का दावा है कि यह राजस्व राज्य की आर्थिक जरूरतों के लिए जरूरी है। पंजाब का पक्ष है कि यह अंतर-राज्यीय प्रोजेक्ट्स पर अनुचित बोझ है।यह विवाद अभी चल रहा है और आगे कानूनी या राजनीतिक स्तर पर हल हो सकता है।


