NRI SANJH JALANDHAR (16 NOVEMBER)
झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के विशेष नवजात देखभाल इकाई (SNCU) में शुक्रवार,(15 नवंबर) की रात भीषण आग लग गई। हादसे में 10 नवजात बच्चों की मौत हो गई, जबकि 39 बच्चों को खिड़की तोड़कर सुरक्षित बाहर निकाला गया। आग रात करीब 10:30 बजे लगी, जब वार्ड में अधिकतर बच्चे सो रहे थे। आग की वजह ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश
हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। उन्होंने कमिश्नर और डीआईजी को 12 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने का आदेश दिया। उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने घटनास्थल का दौरा किया और कहा कि हादसे की तीन अलग-अलग स्तरों पर जांच की जाएगी—स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन और मजिस्ट्रेट। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
आग पर काबू, लेकिन बड़ा नुकसान
आग लगने की सूचना मिलते ही छह दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। NICU वार्ड के अंदर का हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। यहां से बच्चों को निकालना मुश्किल था क्योंकि प्रवेश और निकास का एक ही रास्ता था, जो धुएं से भर गया था। स्थानीय लोगों और अस्पताल स्टाफ ने मिलकर बचाव कार्य किया।
- सीएम योगी आदित्यनाथ ने झांसी मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में आग की वजह से मृत बच्चों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपए और घायल बच्चों के परिजनों को 50-50 हजार रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की है।
- आग में बच्चे को खो चुकी एक मां ने कहा, ‘हमारा नवजात एक महीने से यहां भर्ती था। उसके सिर में पानी भर गया था। कल उसका ऑपरेशन हुआ था और फिर उसे NCIU में रखा गया। रात करीब 10 बजे वहां आग लग गई। हम तुरंत बच्चे को बचाने के लिए दौड़े, लेकिन हमें रोक दिया गया। इसके बाद काफी देर तक बच्चा ढूंढते रहे, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। बाद में हमें बताया गया कि हमारा बच्चा आग में झुलसकर मर गया। मेरे पति ने जाकर उसे देखा उसके बाद बताया कि हमारा बच्चा जल गया।’
सुरक्षा उपायों में कमी का आरोप
घटना के दौरान सुरक्षा अलार्म काम नहीं कर रहे थे, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल स्टाफ ने बच्चों को बचाने की बजाय भागने का प्रयास किया। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से शुरू हुई आग तेजी से फैली, जिससे बचाव कार्य में बाधा आई। फायर सेफ्टी ऑडिट फरवरी में हुआ था, लेकिन अलार्म सिस्टम की उचित मेंटेनेंस नहीं की गई थी।
झांसी के अस्पताल में कैसे लगी आग: लापरवाही या शॉर्ट सर्किट से हुआ हादसा? चश्मदीदों की सुनिए
झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के चाइल्ड वार्ड में शुक्रवार देर रात भीषण आग लगने से 10 नवजात बच्चों की मौत हो गई। घटना में 16 बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे का कारण पहले शॉर्ट सर्किट बताया गया, लेकिन चश्मदीदों ने इसे लापरवाही का नतीजा बताया। माचिस की एक तीली ने पूरे वार्ड को चपेट में ले लिया। प्रशासन और सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। चश्मदीदों का दावा है कि अगर सावधानी बरती गई होती तो यह हादसा टाला जा सकता था। यहां पढ़िए चश्मीदीदों ने क्या देखा।
चश्मदीद भगवान दास ने क्या देखा?
हमीरपुर के रहने वाले भगवान दास उस वक्त वार्ड में मौजूद थे। भगवान दास ने बताया कि ऑक्सीजन सिलेंडर के पाइप को जोड़ने के लिए नर्स ने माचिस की तीली जलाई। जैसे ही तीली जली, पूरे वार्ड में आग भड़क गई। भगवान दास ने तुरंत अपने गले में पड़े कपड़े से तीन-चार बच्चों को लपेटकर बाहर निकाला। इसके बाद वार्ड में अफरातफरी मच गई।
पीड़ित पिता के छलके दर्द
महोबा के रहने वाले कुलदीप, जिनके नवजात बेटे की मौत हो गई, ने बताया, ‘डॉक्टरों की लापरवाही से मेरा बेटा मरा गया। आग लगते ही हम अंदर जाना चाहते थे, लेकिन गार्ड्स ने रोक दिया। कुलदीप ने कहा कि हादसे के वक्त करीब 50 बच्चे वार्ड में थे। हादसे के वक्त अस्पताज के फायर अलार्म और आग बुझाने वाले सिलेंडर काम नहीं कर रहे थे।’
बुजुर्ग संतरा देवी ने बचाई बच्चे की जान
बुजुर्ग महिला संतरा देवी ने एक बच्ची को बचाया। संतरा देवी ने कहा, “मेरा पोता तो नहीं बचा, लेकिन किसी की बेटी को जरूर बचा लिया। आग लगते ही सभी लोग अपने बच्चों को लेकर भागने लगे। मैं पोते को ढूंढती रही, लेकिन वो नहीं मिला। संतरा की आंखों में आंसू नजर आ रहे थे। संतरा देवी ने कहा कि मैंने इस बच्ची को बचा लिया।
संजना ने हादसे में खोया पहला बच्चा
ललितपुर की संजना ने कहा, “मेरा बच्चा जल गया। हमने देखा नहीं, लेकिन अब वो जिंदा नहीं है। ये मेरा पहला बच्चा था।” संजना ने कहा कि हम लोग दवा लाने के लिए गए थे। इतने में आग लग गई। इसके बाद सभी बच्चों के परिजनों को अंदर जाने से रोक दिया गया। कई घंटो बाद हमें बताया गया कि हमारे बच्चे की जलकर मौत हो गई है।


