Friday, April 24, 2026

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मदरसों को मिलती रहेगी सरकारी फंडिंग, सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से किया इंकार, योगी सरकार को भी इस फैसले पर दिया झटका

NRI SANJH JALANDHAR (21 OCTOBER)

मदरसों को सरकारी फंडिंग मिलती रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आज (21अक्टूबर) सरकारी मान्यता प्राप्त मदरसों को फंडिग रोकने की NCPCR की सिफारिश पर रोक लगा दी है। साथ ही गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के बच्चे को सरकारी स्कूल भेजने पर रोक लगा दी है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने ये फैसला सुनाया. तीन जजों की इस बेंच ने NCPCR की सिफारिश पर कार्रवाई करने से मना कर दिया।

दरअसल राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपनी हालिया रिपोर्ट में मदरसों की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई थी। सरकार द्वारा उन्हें दी जाने वाली धनराशि को रोकने का आह्वान किया था। मामले में आज सुनवाई करते हुए NCPCR की इस सिफारिश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।

योगी सरकार के फैसले पर भी रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में ट्रांसफर करने के यूपी सरकार के फैसले पर भी रोक लगाई है। दरअसल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने शिक्षा के अधिकार कानून का अनुपालन नहीं करने पर सरकारी वित्त पोषित और सहायता प्राप्त मदरसों को बंद करने की सिफारिश की थी।

बता दें कि योगी सरकार ने गैर-मान्यता प्राप्त और सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले गैर-मुस्लिम छात्रों को सरकारी स्कूलों में ट्रांसफर करने का निर्देश जारी किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार के इस आदेश के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद ने याचिका दायर की थी।

NCPCR ने क्या की थी सिफारिश

दरअसल 8 दिन पहले राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सभी राज्यों को लेटर लिखकर कहा था कि मदरसों को दिया जाने वाला फंड बंद कर देना चाहिए। ये राइट-टु-एजुकेशन (RTE) नियमों का पालन नहीं करते हैं। आयोग ने ‘आस्था के संरक्षक या अधिकारों के विरोधी: बच्चों के संवैधानिक अधिकार बनाम मदरसे’ नाम से एक रिपोर्ट तैयार करने के बाद ये सुझाव दिया था।NCPCR ने कहा था- मदरसों में पूरा फोकस धार्मिक शिक्षा पर रहता है, जिससे बच्चों को जरूरी शिक्षा नहीं मिल पाती और वे बाकी बच्चों से पिछड़ जाते हैं।

मदरसों को बंद करने के लिए नहीं कहा- NCPCR

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि उन्होंने मदरसों को बंद करने के लिए कभी नहीं कहा बल्कि उन्होंने इन संस्थानों को सरकार द्वारा दी जाने वाली धनराशि पर रोक लगाने की सिफारिश की क्योंकि ये संस्थान गरीब मुस्लिम बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने बच्चों को मदरसा के बजाय सामान्य विद्यालयों में दाखिला देने की सिफारिश की है।

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