दिल्ली-एनसीआर में रेप के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि, असामाजिक तत्वों में डर पैदा कीजिए. उन्हें लगे कि अब कुछ किया तो मारे जाएंगे. दिल्ली में हुए रेप केस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है. सोमवार को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के कई अधिकारी वहां मौजूद रहे.जस्टिस पारडीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, ”सिर्फ सीसीटीवी होना जरूरी नहीं है।
उसकी मॉनिटरिंग हो. क्या आपके पास वार रूम जैसी व्यवस्था है, जहां लगातार निगरानी होती हो? यह जरूरी है कि हर महिला को सुरक्षित महसूस हो. चाहे वह रात में सड़क पर पैदल चल रही हो या मेट्रो या बस में यात्रा कर रही हो.”कोर्ट ने कहा, ”हजारों अवैध इटरीज हैं. उन पर कार्रवाई कीजिए. यहां असमाजिक तत्वों का जमघट होता है, शराब मिलती है।
गैरकानूनी गतिविधियां होती हैं. बीट पेट्रोलिंग व्यवस्था को मजबूत कीजिए. असुरक्षित जगहों पर पैट्रोलिंग गाड़ी रुके.” बेंच ने कहा, ”असामाजिक तत्वों में डर पैदा कीजिए. उन्हें लगे कि अब कुछ किया तो मारे जाएंगे. लोगों से इंटरैक्ट कीजिए. आप प्रोटेक्टर ऑफ सोसाइटी हैं. जानिए कि कैसे लोग रह रहे हैं. आपको गलत तत्वों के प्रति सख्त होना पड़ेगा. इसे लेकर आप पर आरोप लगेंगे, दबाव बनेगा, लेकिन सख्ती जारी रखें।
ऐसे कदम उठाइए कि लोग आपके पास आते हुए डरे नहीं, सुरक्षित महसूस करें.’कोर्ट ने कहा, हम आदेश पारित करेंगे. आप उसे पढ़ कर कदम उठाएं. हम यह भी देखना चाहेंगे कि लंबित मामले किस तरह चल रहे हैं. आदेश का दूसरा हिस्सा सुरक्षा को लेकर तात्कालिक उपायों पर होगा।
ऐसा न हो कि जब तक आप जवाब दाखिल करें, इस तरह के और अपराध हो जाएं. आप सख्ती कीजिए. अपराधियों के मन में डर पैदा कीजिए. मानवाधिकार कार्यकर्ता आप पर आर्टिकल 21 के हनन के आरोप लगाएंगे, लेकिन आपको सख्त होना होगा.कोर्ट ने कहा, समाज की हर महिला हमारी माता है, बहन है।
हमें उन्हें सुरक्षित महसूस करवाना होगा. जिस तरह से घर पर महिलाओं की सुरक्षा का ध्यान रखते हैं, वैसा ही समाज में भी करना होगा. बस में एक महिला अकेले सफर कर रही है तो उसकी जानकारी आपको होनी चाहिए. आपको उसकी सुरक्षा के लिए सक्रिय होना होगा। 16 नवंबर को अगली सुनवाई.


