Tuesday, August 18, 2026

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छात्रों के प्रदर्शन के बाद हुए एक्शन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई

दिल्ली समेत अन्य राज्यों में छात्रों के प्रदर्शन के बाद हुए एक्शन के मामले में मंगलवार (18 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी में कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार संविधान देता है. साथ ही उन्होंने पूर्व जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की बात कही.वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह सभी एफआईआर को रद्द करने का आदेश दे।

इसका सरकार ने विरोध किया. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उपद्रवियों को राहत नहीं मिले.वहीं वकील सैयद रिजवान ने एफआईआर रद्द करने की मांग का विरोध करते हुए कहा कि इससे गलत उदाहरण बनेगा. रिजवान ने कहा कि संसद मार्च गैरकानूनी था. इसके बाद CJI ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार संविधान देता हैकोर्ट ने यह भी कहा कि वह हाई पावर्ड कमेटी बनाएगा।

सभी पक्ष कमेटी के सामने अपनी बात रख सकेंगे. कोर्ट ने कहा कि सभी पक्ष एफआईआर की लिस्ट सौंपें.रिजवान ने कहा कि एफआईआर रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से विशेष शक्ति के इस्तेमाल की मांग कर रही है. लेकिन क्या इन लोगों को पछतावा है. कोर्ट उनसे हलफनामा ले कि उन्हें अफसोस है. ऐसा नहीं हुआ तो कल को यही लोग इसे सुप्रीम कोर्ट की कमज़ोरी की तरह बताएंगे।

इसपर याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि इनका क्या लोकस है. रिजवान ने इसपर कहा कि सबका लोकस है. यह अहम मामला है. आप संसद तक यूं ही नहीं चले जा सकते. यह संदेश जाना चाहिए. कोर्ट ने इसके बाद कहा कि हमने आपके सुझाव को नोट किया है. घायल पुलिसकर्मियों के परिवार की वकील ने भी कहा कि कुछ भी कार्रवाई से पहले उनकी बात पर भी विचार करना चाहिए।

कोर्ट ने सरकार से उन मामलों की लिस्ट मांगी जिनकी जांच जारी रखने की ज़रूरत है.एक वकील ने महिला प्रदर्शनकारियों को मिल रही ऑनलाइन धमकियों का मसला रखा. इसपर कोर्ट ने कहा कि हम ऐसी बातों को गंभीरता से लेते हैं. वकील ने कहा कि उनकी शिकायत ली जानी चाहिए.CJI ने इसपर कहा कि जब हम पूर्व जज की अध्यक्षता में कमेटी बना रहे हैं तो वहां सब जा सकते हैं.वृंदा ग्रोवर ने कहा कि हमें भी सभी एफआईआर मिले।

हम उन्हें पढ़ कर कोर्ट की सहायता करना चाहते हैं. वकील शादान फरासत ने कहा कि महिला प्रदर्शनकारियों पर गलत तरीके से बलप्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों पर सरकार कार्रवाई करे ।इसपर सीजेआई ने कहा कि कमेटी हर बात को देखेगी. इसपर एक वकील ने कहा कि दोनों पक्षों की तरफ से नोडल वकील नियुक्त किए जाएं जो कोर्ट की सहायता करें।

वहीं CJI ने कहा कि हमने कमेटी में शामिल होने के लिए एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज और पूर्व डीजीपी से सहमति ली है. कोर्ट ने कहा कि हमने एक पूर्व सीबीआई डायरेक्टर की भी सहमति ली है. बाकी सुझावों पर भी हम विचार करेंगे.वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि एक पूर्व अटॉर्नी जनरल को भी रखने पर विचार हो. इसके बाद CJI ने कहा कि अगर आप सब लोग अपने सुझाव आज दे दें तो हम कल आदेश देने का प्रयास करेंगे. एक वकील ने कमेटी में महिला सदस्य भी रखने की मांग की.

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