मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज किसान क्रेडिट कार्ड (के.सी.सी.) प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार किया है। इसके तहत 26 साल पुराने उस ढांचे को बदल दिया गया है जिसने किसानों को लंबे समय से अपर्याप्त संस्थागत कर्ज पर निर्भर रहने और साहूकारों के रहमो-करम पर छोड़ दिया था।यह नई नीति फसल की वास्तविक लागत के अनुसार फसल-वार कर्ज की सीमा (क्रेडिट लिमिट) को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाती है, ब्याज के बोझ को कम करती है, अधिक मुनाफे वाली फसलों और सहायक क्षेत्रों के लिए कर्ज की पात्रता का विस्तार करती है।
यहां तक कि पराली प्रबंधन के लिए विशेष वित्तीय सहायता शुरू करती है और किसानों को ए.टी.एम. और यू.पी.आई. जैसे आधुनिक डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से धन का उपयोग करने में सक्षम बनाती है।इन सुधारों को कृषि को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाने की दिशा में अहम फैसला बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि नया के.सी.सी. ढांचा किसानों के हाथों में अधिक पैसा सीधे पहुंचाएगा, गेहूं-धान के चक्र से बाहर फसल विविधता को तेज करेगा, सहकारी कर्ज संस्थाओं को मजबूत करेगा
और किसानों को कर्ज के जाल से बाहर निकालने में मदद करेगा। इन सुधारों से पंजाब भर के 13 लाख से अधिक किसानों को लाभ होने की उम्मीद है, जिसमें कई फसलों के लिए कर्ज सहायता में भारी वृद्धि होगी। इसमें बागवानी फसलें भी शामिल हैं, जहां पहले मिलने वाली 32,000 रुपए प्रति एकड़ की एकसमान सीमा के मुकाबले अब कर्ज 1.57 लाख रुपए प्रति एकड़ तक जा सकता है।मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह सिर्फ कोई नीतिगत बदलाव नहीं है, बल्कि पंजाब के किसानों की आर्थिक आजादी के उद्देश्य से लिया गया ऐतिहासिक फैसला है।
हमने लाल फीताशाही को समाप्त कर दिया है, यह सुनिश्चित किया है कि अधिक पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचे और प्राथमिक कृषि सहकारी सभाओं (पी.ए.सी.एस.) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के लिए प्रभावी ढंग से किसानों की सेवा करना आसान बना दिया है। हमने अपने किसानों को 21वीं सदी के डिजिटल साधनों से लैस किया है और वे अब पंजाब की तरक्की की नई कहानी लिखेंगे।
“इस सुधार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबा सरकार ने वर्ष 2000 से चले आ रहे पुराने के.सी.सी. सिस्टम को बदलकर 26 सालों की स्थिरता को तोड़ा है। उन्होंने कहा, “दो दशकों से अधिक समय से पंजाब के किसानों को हाथों-हाथ कागजी कार्रवाई, चेक बुक और पासबुकों के आस-पास घूमने वाले पुराने और जटिल के.सी.सी. ढांचे पर निर्भर रहने के लिए मजबूर किया गया था। पिछली सरकारों ने इस स्थिति को सुधारने के बजाय ज्यों-का-त्यों रहने दिया।
हमारी सरकार ने उस 26 साल पुराने सिस्टम को बदलकर पारदर्शी, डिजिटल और बेहतरीन कर्ज व्यवस्था लागू की है, जो कि आधुनिक कृषि की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।”मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि संशोधित नीति से किसानों को मिलने वाली कर्ज सीमा में भारी वृद्धि होगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बैंक कर्ज फसल की वास्तविक लागत को दर्शाता हो। उन्होंने कहा, “हमने गेहूं के लिए कर्ज सीमा 24,380 रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर 30,000 रुपए प्रति एकड़ कर दी है।
इसी तरह धान के लिए 25,440 रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर 39,000 रुपए प्रति एकड़ कर दिया गया है। इससे किसानों को वह वास्तविक वित्तीय सहायता मिलेगी जिसके वे हकदार हैं।”मुख्यमंत्री ने कहा कि के.सी.सी. के नए ढांचे में फसलों के अवशेष प्रबंधन को शामिल करने वाला पहला सूबा बनकर पंजाब, देश भर में अग्रणी सूबे के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा, “धान की संशोधित 39,000 रुपए प्रति एकड़ की सीमा में से 2,000 रुपए प्रति एकड़ विशेष रूप से फसली अवशेष प्रबंधन के लिए रखे गए हैं। देश में पहली बार किसानों को पराली प्रबंधन के लिए विशेष सहायता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के लिए वित्तीय रूप से मजबूत किया जा रहा है।”


