पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने आज अहम मामले में सुनवाई की है हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत पेंशनभोगियों को लंबित विभागीय या न्यायिक कार्यवाही का हवाला देकर वृद्धावस्था भत्ता और यात्रा रियायत से वंचित किया जा रहा था। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि बिना किसी कानूनी प्रावधान के, केवल प्रशासनिक आदेशों के आधार पर सेवानिवृत्ति लाभों को रोका नहीं जा सकता।
यह मामला पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा दायर एक याचिका से संबंधित था। याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2022 की उस स्पष्टीकरण को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि जिन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय या न्यायिक कार्यवाही लंबित है और जो अंतरिम पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें वृद्धावस्था भत्ता और यात्रा में रियायत नहीं मिलेगी।
हाई कोर्ट ने 22 दिसंबर, 2022 के आदेश को रद्द करते हुए, राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सभी पात्र कर्मचारियों को 6 सप्ताह के भीतर बकाया वृद्धावस्था भत्ता और यात्रा रियायत जारी करे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला उन सभी कर्मचारियों पर लागू होगा जिनकी परिस्थितियां समान हैं, चाहे उन्होंने याचिका दायर की हो या नहीं।


