सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर तैनात न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा करेंगे केंद्रीय बलों के जवान करेंगे। मालदा में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया था। दरअसल, मालदा जिले की मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर वहां भीड़ काफी उग्र हो गई थी। इसी दौरान सैकड़ों लोगों ने कालीचक 2 बीडीओ ऑफिस के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया जो देर रात तक चला था।
केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम राज्य सरकार के अधिकारियों पर न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए भरोसा नहीं कर सकते है। उन्होंने कहा कि हम उनकी सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग करते है। इस पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि 11 बजे तक आपके जिलाधिकारी घटनास्थल पर नहीं थे।
मुझे रात में काफी सख्त आदेश जारी करने पड़े थे। 5 साल के बच्चे को खाना और पानी तक नहीं मिल पा रहा था। शीर्ष अदालत ने इसके बाद न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय बलों को सौंपने का आदेश दिया। उल्लेखनीय है कि बंधक बनाए गए अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी पहले तो न्यायिक अधिकारियों के साथ मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन जब उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली तो वहां शाम को विरोध बढ़ने लगा और फिर पूरे परिसर का घेराव किया गया।
उस वक्त ऑफिस के अंदर तीन महिला अधिकारियों समेत सात न्यायिक अधिकारी थे। सुप्रीम कोर्ट ने SIR की समीक्षा के काम में चुनाव आयोग और ममता सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच इन न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का आदेश दिया था और उन्हें इस काम में मदद करने की जिम्मेदारी दी गई थी


