सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए 2019 के अपने महत्वपूर्ण फैसले को बरकरार रखा है।यह फैसला राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे और उस पर ब्याज से संबंधित है।NHAI ने अदालत से अनुरोध किया था कि 2019 के फैसले को पुराने मामलों पर लागू न किया जाए, क्योंकि इससे सरकार पर लगभग 29,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
लेकिन मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि भूमि का उचित मूल्य (मुआवजा) एक संवैधानिक अधिकार है और सिर्फ वित्तीय बोझ का हवाला देकर इससे पीछे नहीं हटा जा सकता। इसलिए अदालत को फैसले पर दोबारा विचार करने का कोई ठोस कारण नहीं दिखा।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 2019 से पहले जिन मामलों में भूमि मालिकों को मुआवजा मिल चुका है या अंतिम मुआवजा तय हो चुका है, उन मामलों को दोबारा नहीं खोला जा सकेगा।अदालत ने कहा कि NH एक्ट के तहत अधिग्रहित भूमि के मालिक, जिनके दावे 28 मार्च 2008 को या उसके बाद किसी भी फोरम के सामने लंबित थे,
वे मुआवजा, ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज का दावा करने के हकदार हैं।लेकिन जिनके मामले 28 मार्च 2008 से पहले ही निपटाए जा चुके थे और उन्होंने कोई अपील नहीं की थी, वे इस फैसले के आधार पर दोबारा मामला नहीं खोल सकते।यह फैसला भूमि मालिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जबकि सरकार के लिए वित्तीय बोझ बढ़ने की संभावना है।


