मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ शुरू हुई जंग आज चौथे दिन में पहुंच गई ।प्रदर्शन के चलते श्रीनगर दूसरे दिन भी बंद है। आयतुल्लाह खामेनेई की मौत के गम में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया है। एक दिन पहले पुलिस ने लोगों पर लाठीचार्ज किया था, आंसू गैस के गोले भी छोड़ थे। पूरे शहर में भारी सुरक्षाबल की तैनाती की गई है।
लाल चौक पर कटीले तारों की बैरिकेडिंग की गई है। श्रीनगर के बेमिना इलाके में कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया। शोपियां, बारामूला, बांदीपोरा में लोगों ने बाजार बंद रखा है।ये सब 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की जॉइंट स्ट्राइक्स से शुरू हुआ था, जब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। तब से अब तक हालात बहुत तेजी से बिगड़े हैं।
ईरान ने जवाबी हमले शुरू किए, गल्फ देशों में अमेरिकी बेस और दूतावासों पर ड्रोन और मिसाइल दागे।इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर अटैक बढ़ाए। ईरान में मौतों का आंकड़ा अब 742 से ऊपर पहुंच गया है और दुनिया भर में तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई ।
सब कुछ अचानक शुरू हुआ। अमेरिका और इजरायल ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ लॉन्च किया. इजरायली F-35 और अमेरिकी B-2 बॉम्बर्स ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स, बैलिस्टिक मिसाइल बेस और लीडरशिप टारगेट्स पर हमले किए।तेहरान में खामेनेई का घर हिट हुआ और ईरानी मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि की. पहले दिन ईरान में करीब 200 लोग मारे गए, जिसमें ज्यादातर मिलिट्री पर्सनल शामिल थे।
अमेरिका ने कहा कि ये ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को रोकने के लिए था। इजरायल के PM बेंजामिन नेतन्याहू ने बाद में फॉक्स न्यूज को बताया कि अगर अब नहीं रोकते, तो ईरान के प्रोग्राम कुछ महीनों में हमलों से ‘इम्यून’ हो जाते यानी अंडरग्राउंड बंकर इतने मजबूत कि कोई हमला काम नहीं कर सकता था।
इजरायल ने GBU-28 बंकर बस्टर बॉम्ब इस्तेमाल किए, अमेरिका ने टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागीं. कुल 500 से ज्यादा टारगेट हिट हुए।ईरान ने पहले दिन कोई बड़ा जवाब नहीं दिया, लेकिन रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी।


