पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारतीय रुपया दबाव में आ गया है। United States और Israel द्वारा Iran पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे भारतीय मुद्रा में पिछले एक महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है, इसलिए तेल कीमतों में तेजी का सीधा असर रुपये और महंगाई की आशंकाओं पर पड़ता है।
सोमवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार (Interbank Forex Market) में रुपया 21 पैसे टूटकर 91.29 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. यह 91.23 पर खुला और शुरुआती कारोबार में और फिसल गया. इससे पहले शुक्रवार को रुपया 17 पैसे की गिरावट के साथ 91.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रुपये पर दबाव के कारण विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया।
विशेषज्ञों की राय विश्लेषकों का कहना है कि हालिया हमलों में अमेरिकी और इजराइली बलों ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों और नौसैनिक संसाधनों को निशाना बनाया।ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबरों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और क्षेत्र के अन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए है,
जिससे भू-राजनीतिक अनिश्चितता गहरा गई है।विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और चालू खाते का घाटा भी बढ़ने का जोखिम है।ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजारों में घबराहट का माहौल है, जिसका असर उभरते बाजारों की मुद्राओं, खासकर रुपये, पर साफ दिखाई दे रहा है।


