जालंधर शहर में बाल भिक्षा की समस्या के खात्मे के लिए डिप्टी कमिश्नर डा.हिमांशु अग्रवाल ने बाल भिक्षा को रोकने और इसमें शामिल बच्चों के पुनर्वास के लिए संवेदनशील और ठोस प्रयास करने पर जोर दिया।यहां जिला प्रशासकीय परिसर में प्रोजैक्ट जीवनजोत 2.0 की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि बाल भिक्षा केवल कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि सामाजिक और मानवीय दृष्टि से भी गंभीर चुनौती है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस समस्या के समाधान के लिए बाल भिक्षा में शामिल व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई करने के साथ-साथ बाल भिक्षा में शामिल बच्चों की पहचान कर उनकी सुरक्षा, उचित देखभाल, काउंसलिंग और पढ़ाई के लिए ठोस उपाय सुनिश्चित किए जाएं, ताकि उन्हें अच्छा भविष्य दिया जा सके।
डा.अग्रवाल ने ऐसे बच्चों के माता-पिता के पुनर्वास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता को कौशल प्रशिक्षण आदि उपलब्ध करवाया जाए, ताकि उनके लिए रोजगार का रास्ता साफ हो सके और वह अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकें तथा बच्चों को भिक्षा मांगने की ओर धकेलने की मजबूरी खत्म हो सके।



