पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब एंव केंद्र सरकार को निर्देश दिए हाईकोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की सिक्योरिटी के मामले में एक अहम सुनवाई की और दोनों सरकारों से मजीठिया की जान को खतरे का फिर से आकलन करने और एक रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है।
पंजाब सरकार ने कोर्ट को बताया कि अभी मजीठिया की सिक्योरिटी में 15 पुलिस वाले तैनात है। हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या जेल से रिहा होने के बाद मजीठिया को मिल रही धमकियों या खतरों पर कोई नया थ्रेट असेसमेंट किया गया था? जब सरकार कोई ठोस जवाब नहीं दे पाई, तो कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया।हाई कोर्ट ने पंजाब के चीफ सेक्रेटरी को डीजीपी के साथ मिलकर एक रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया है।
केंद्र और राज्य सरकार को अगली सुनवाई में मजीठिया के ‘थ्रेट असेसमेंट’ पर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट जमा करनी होगी। कोर्ट ने साफ किया कि जब तक नई रिपोर्ट नहीं आ जाती, पंजाब सरकार मजीठिया की सिक्योरिटी में कोई लापरवाही न करे और इसे पक्का करे।इस केस की अगली सुनवाई अब 6 मार्च, 2026 को होगी।
बिक्रम मजीठिया लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि उनकी सिक्योरिटी में कटौती करके उन्हें टारगेट करने की कोशिश की जा रही है। हाई कोर्ट के इस फैसले से अब यह तय हो जाएगा कि उन्हें सेंट्रल सिक्योरिटी (जैसे Z+ या दूसरी) की ज़रूरत है या नहीं।



