अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ अमेरिका की बातचीत काफी अच्छी रही है। यह बातचीत शुक्रवार को ओमान में हुई, जहां दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने सीधे आमने-सामने नहीं, लेकिन बातचीत के जरिए चर्चा की। ट्रंप ने इशारा किया कि ईरान किसी समझौते के लिए तैयार दिख रहा है, लेकिन आखिरी फैसला इस बात पर होगा कि समझौते की शर्तें क्या तय होती है।
ओमान में हुई यह बैठक पिछले साल अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक बातचीत थी. इन हमलों में ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। अब दोनों पक्षों ने अपने-अपने देशों से सलाह लेने के बाद आगे बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है।
ट्रंप ने कहा कि अगला दौर अगले हफ्ते की शुरुआत में हो सकता है, हालांकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है।बातचीत में ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल हुए। इसके अलावा ट्रंप के दामाद जारेड कुश्नर भी इस प्रक्रिया का हिस्सा थे।
बातचीत की मध्यस्थता ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने की। उन्होंने अलग-अलग दोनों प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की।ईरान का कहना है कि बातचीत का दायरा सिर्फ उसके परमाणु कार्यक्रम तक ही सीमित रहा। अराघची ने साफ कहा कि बैलिस्टिक मिसाइलों, क्षेत्र में सक्रिय गुटों या देश की अंदरूनी राजनीति पर कोई चर्चा नहीं हुई। ईरान ने यह भी कहा कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को सिर्फ शांतिपूर्ण कामों तक सीमित रखने की गारंटी देने को तैयार है,
अगर उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटा दिए जाएं। उसने यह भी बताया कि वह इसे 60 फीसदी तक सीमित रखने को तैयार है।वहीं, अमेरिका चाहता है कि बातचीत का दायरा और बड़ा हो और इसमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, इलाके में सक्रिय सशस्त्र संगठनों को समर्थन और मानवाधिकार से जुड़े मुद्दे भी शामिल हों।
सबसे बड़ा विवाद यूरेनियम संवर्धन को लेकर है। ईरान इसे अपना हक मानता है, जबकि अमेरिका और उसके साथी देश इसे परमाणु हथियार की तरफ बढ़ने का कदम मानते है। बातचीत के एक दिन बाद अराघची ने फिर दोहराया कि ईरान यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह रोकने के लिए तैयार नहीं है।



