अमेरिका और भारत के बीच पहले मधुर संबंध थे, लेकिन हाल के कुछ समय से परिस्थितिया बदली है और दोनों देशों के बीच तनाव देखने को मिल रहा है। इस संदर्भ में, अमेरिका ने गैर-आप्रवासी वीजा (Non-Immigrant Visa – NIV) नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सभी आवेदकों को वीजा साक्षात्कार अपने नागरिकता वाले देश या कानूनी निवास स्थान पर ही देना होगा। इसका मतलब है कि भारतीय नागरिक अब जल्दी यात्रा के लिए थाईलैंड, सिंगापुर या जर्मनी जैसे देशों में जाकर B1 (बिजनेस) या B2 (पर्यटक) वीजा का इंटरव्यू नहीं दे सकेंगे।
यह बदलाव पर्यटक, बिजनेस, छात्र, अस्थायी कर्मचारी और अमेरिकी नागरिकों से शादी के लिए वीजा लेने वालों पर लागू होगा।अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, भारत में NIV इंटरव्यू के लिए वर्तमान वेटिंग हैदराबाद और मुंबई में 3.5 महीने दिल्ली में 4.5 महीने कोलकाता में 5 महीने चेन्नई में 9 महीने है।डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान वीजा नियमों को लगातार सख्त किया जा रहा है। 2 सितंबर, 2025 से नया नियम लागू हुआ है, जिसमें सभी NIV आवेदकों को, उम्र की परवाह किए बिना (14 वर्ष से कम और 79 वर्ष से अधिक सहित), सामान्य तौर पर व्यक्तिगत रूप से काउंसलर साक्षात्कार देना होगा।
हालांकि कुछ मामलों में छूट अभी भी उपलब्ध है। जिन लोगों का पहले जारी किया गया B1, B2 या B1/B2 वीजा पिछले 12 महीनों में समाप्त हुआ है और जिनकी उम्र उस समय 18 वर्ष या उससे अधिक थी, उन्हें कुछ मामलों में इंटरव्यू से छूट मिल सकती है।यह नीति परिवर्तन भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का एक हिस्सा मानी जा सकती है। पहले भारतीय नागरिक लंबे प्रतीक्षा समय से बचने के लिए तीसरे देशों में इंटरव्यू का विकल्प चुनते थे, लेकिन अब यह संभव नहीं होगा। इससे भारत में प्रतीक्षा समय और बढ़ सकता है, खासकर चेन्नई जैसे शहरों में, जहाँ पहले से ही 9 महीने की प्रतीक्षा है। यह बदलाव भारतीय यात्रियों, विशेष रूप से व्यवसायियों और पर्यटकों, के लिए यात्रा योजनाओं को जटिल बना सकता है।


